पथरी का प्राकृतिक इलाज :-
आयुर्वेद की दुनिया में भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी के नाम से फेमस पत्थरचट्टा मानव शरीर के किसी भी भाग में हुए पथरी को खत्म कर सकता है। मेडिकल साइंस में इसे ब्रायोफील्लुम पिन्नाटम भी कहा जाता है।
पत्थर चट्टा का पौधा :-
पत्थर चट्टा का पौधा खाने में खट्टा और नमकीन होता है। यह स्वाद में भी स्वादिष्ट भी है।
पत्थर चट्टा उगाने का तरीका
आप इसके पत्तों को किसी भी तरह की जमीन के अंदर डाल दें। यह उस जगह पर उग जाता है। पत्थर चट्टा की तासीर बहुत ही सामान्य होती है। इसलिए हर मौसम में आप इसका सेवन कर सकते हैं।
कैसे प्रयोग करें
पत्थरचट्टा के दो पत्तों को तोड़कर उसे अच्छे से पानी में साफ कर लें और सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ इसका सेवन करें। नियमित इस्तेमाल करने से थोड़े ही दिनों में आपके शरीर में मौजूद पथरी टूट कर शरीर से बाहर निकल जाएगी। आप पत्थर चट्टा के पत्तों को चबाकर या इसकी पकौड़े बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। पत्थरचट्टा के रस में आप सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। इससे पेट में होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है।
यदि पित्ताशय की पथरी हो तो इसे उपयोग करने का तरीका :-
अजवायन के 10 पत्तों और पत्थरचट्टा के 10 पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और इसमें एक चम्मच गोखरू (आसानी से बाजार में मिल जाएगा) मिला दे और सुबह खाली पेट लगातार तीन दिनों तक सेवन करें। इसके सेवन के बाद आपको दस्त और उल्टियां भी लग सकती हैं लेकिन इसकी चिंता न करें।
पेशाब के रास्ते मे पथरी हो तो उपयोग करने का तरीका :-
एक गिलास पानी में पथरचटा के 10 पत्तों को उबालकर काढ़ा बना लीजिए। इस काढ़े को रोज सुबह खाली पेट सेवन करें। इस विधि से 15 दिनों के अंदर ही पथरी टूट जाएगी और मूत्र मार्ग से पथरी बाहर आ जाएगी।
अन्य फायदे :-
मूत्र संबंधी जितने भी रोग होते हैं उसमें भी पत्थरचट्टा बेहद लाभदायक दवा है। इससे पेशाब की जलन व पुरूषों में होने वाली प्रोस्टेट की समस्या भी ठीक होती है। महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज और पेशाब में जलन की समस्या भी पत्थर चट्टा के सेवन से ठीक हो जाती है।
सावधानियां व परहेज :-
इस औषधि का सेवन करते समय चूना, बिना साफ किये हुए फल और अधिक चावल आदि का सेवन न करें।
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