शनिवार, 29 जुलाई 2017
मंगलवार, 25 जुलाई 2017
गुरुवार के दिन करें ये छोटा सा काम मिलेगी मनचाही नौकरी
हर किसी की चाहत होती है कि वह एक ऐसी नौकरी करे जिसमें अच्छे पैसे के साथ-साथ उसकी तरक्की भी हो।लेकिन कभी-कभी आपकी कुंडली में गुरु ग्रह दोष होता है जिसके कारण आपको नौकरी मिलने में परेशानी होती है और इसी के साथ ही आपको शादी और भाग्य में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड सकता है। अगर आपके जीवन में ऐसी मुश्किलें उत्पन्न हो रही है तो इनका समाधान करने के लिए गुरुवार का दिन आपके लिए शुभ हो सकता।
गुरूवार का दिन भगवान् बृहस्पति का दिन माना जाता है। भगवान् बृहस्पति सभी देवताओं के गुरू हैं, कैसी भी समस्या हो ये सभी का समाधान करते हैं। तो गुरूवार के दिन गुरु का एक सरल मंतर जाप करने से आप अपनी राह में आने वाली सभी अड़चनों को दूर कर सकते है। जानिए कुछ ऐसे उपाय जिनसे आप अपने ग्रह दोष दूर कर सकते है।
गुरुवार व्रत विधि :-
इस दिन सुबह उठकर सबसे पहले भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत करने का संकल्प लें। इसके पश्चात स्नान आदि करने के बाद पीले रंग के वस्त्र पहने और पीले रंग के वस्त्र पर गुरु बृहस्पति की प्रतिमा को रखकर पंचामृत स्नान कराएं। स्नान के बाद गंध, अक्षत, पीले फूलों से भगवान की पूजा करें। पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल से बने पकवान, गुड़, हल्दी या पीले फलों का भोग लगाएं।
इस दिन भगवान बृहस्पति के मंत्र ऊँ बृं बृहस्पते नम: का जाप करके आरती अवश्य करें। इसके पश्चात क्षमा प्रार्थना कर मनोकामना पूर्ति हेतु प्रार्थना करें।दरअसल गुरुवार के दिन व्रत-पूजा से गुरु ग्रह की कृपा से सुख-समृद्धि मिलती है। इसके साथ-साथ गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का प्रयोग करें, पीले चन्दन से पूजा तथा पूजा के बाद कथा अवश्य सुनें। इस दिन एक ही समय भोजन करें और ध्यान रहे, भोजन में पीले चने की दाल आदि का ही प्रयोग करें।परन्तु भोजन में नमक का प्रयोग कदापि न करें।
गुरुवार व्रत का फल :-
इस व्रत को करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और धन-धान्य, पुत्र, विद्या समेत सभी मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है। परिवार को सुख-शान्ति मिलती है। इसलिए इस व्रत को सर्वश्रेष्ठ और अति फलदायक कहा गया है। इस व्रत में केले का पूजन करना चाहिए। कथा और पूजन के समय तन-मन, कर्म, वचन से शुद्ध होकर अपनी इच्छा को बृहस्पतिदेव से पूरी करने की प्रार्थना करनी चाहिए। उन इच्छाओं को बृहस्पतिदेव अवश्य पूर्ण करते हैं ऐसा मन में दृढ़ विश्वास रखना चाहिए।
शनिवार, 22 जुलाई 2017
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मंगलवार, 11 जुलाई 2017
यह ग्रह आदमीयह ग्रह आदमी को दिलाते है गुप्त धन
धन की लालसा किसे नहीं होती। कोई दिन-रात कमाता है तो कोई बिना मेहनत किए ही धन की उम्मीद रखता है। कुछ बिरले लोग भी होते हैं जिन्हें जमीन में गड़ा हुआ धन मिल जाता है। ज्योतिष में ग्रहों की दशा से यह पता चल सकता है कि व्यक्ति को कैसा और कितना धन मिलेगा। जमीन में दबे हुए धन के योग हैं भी या नहीं, यह भी ग्रह तय करते हैं। जानिए, धन दिलाने वाले ग्रह योग।
1. यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बृहस्पति एवं सूर्य ग्रह युग्म में स्थित हों तो ऐसे जातक को धन पर्याप्त रूप में प्राप्त होता है।
2. किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बृहस्पति एवं शनि ग्रह एकसाथ हों तो ऐसे जातक को धन औसत रूप में मिलता है।
3. यदि व्यक्ति की जन्म कुण्डली में बृहस्पति सूर्य एवं शनि ग्रह युग्म में स्थित हों तो ऐसे जातक को राजधन हासिल होता है।
4. किसी व्यक्ति की जन्म कुण्डली में यदि चन्द्रमा ग्रह बृहस्पति के स्वामी भाव में युग्म में स्थित हो तो ऐसे जातक को गडे हुए धन की प्राप्ति होती है। -किसी जातक की जन्म कुण्डली में यदि मंगल ग्रह शुक्र ग्रह के साथ युग्म में स्थित हो तो ऐसे जातक को स्त्री पक्ष से धन की प्राप्ति होती है।
5. किसी जातक की जन्म कुण्डली में यदि मंगल ग्रह बृहस्पति ग्रह के साथ युग्म में हो तो ऐसे जातक को श्रेष्ठ धन मिलता होती है। को दिलाते है गुप्त धन
ऐसे होते हैं ‘S’ से नाम वाले लोग
दिलेर समाचार, पूरी दुनिया जहाँ एस्ट्रोलॉजी के पीछे पागल है, वहीं हम इंडियन्स भी इस मामले में किसी से पिछे थोड़े ही है।
इंडियन एस्ट्रोलॉजी को हमेशा से ही पूरी दुनिया में सटिक और सही माना जाता रहा है इसलिये यहां नाम और राशी को बहुत महत्व दिया जाता है। वैसे तो कहा जाता है कि किसी भी नाम का कोई न कोई अर्थ अवश्य होता है और व्यक्ति के नाम से उसका व्यक्तित्व जाना जा सकता है।
इसीलिए आजकल लोग अपने बच्चों के नाम बड़े ही सोच-समझ कर रखते है।
वैसे तो बच्चों के नाम जन्म के समय पंडितों द्वारा उनकी कुंडली के अनुसार रखे जाते है। लेकिन एक नाम वो होता है जिससे बच्चे को पुकारा जाता है ये नाम माता-पिता द्वारा बहुत ही सोच समझ कर रखा जाता है। लेकिन अब अंग्रेजी के अल्फाबेट से बच्चों के नाम रखे जाने लगे है, इसलिए आज हम आपको बताने जा रहे है अंग्रेजी अल्फाबेट के अक्षर S के बारे में।
1 – होते है मेहनती
S अंग्रेजी के अल्फाबेट का 19 वां लेटर है। ऐसा माना जाता है है कि S नाम वाले लोग बहुत अधिक मेहनती होते हैं। ये लोग अपने लक्ष्य को पाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते है और कड़ी लगन और मेहनत के बल पर सब कुछ हासिल कर लेते है। ऐसे लोग बड़े ही बुद्धिमान होते है और जहाँ से भी ज्ञान मिले ले लेते है।
2 – दिखते है बेहद आकर्षक
S अक्षर वाले लोग देखने में भी बहुत ही आकर्षक दिखाई देते है, और लोगो के बीच बहुत ज्यादा पॉप्युलर होते है। ये लोग बातों के इतने धनी होते है कि सामने वाले पर अपना प्रभाव छोड़ देते है। खासकर लड़कियों के बीच में ये बहुत ज्यादा पसंद किये जाते है।
3 – होते है प्रतिभावान
S अक्षर वाले लोग बहुत अधिक प्रतिभाशाली होते है। जिन लोगो का नाम S लैटर से शुरू होता है वे लोग बड़े ही साफ़ दिल के होते है लेकिन कभी-कभी इनका स्वभाव बहुत ही क्रोधी हो जाता है ऐसे लोग सत्य का साथ देने वाले होते है ये लोग कमांड करने कि भी चाहत रखते है।
4 – प्यार के मामलें में सीरियस होते है
जिन लोगो का नाम S अक्षर से शुरू होता है ये लोग प्यार के मामले में थोड़ा गंभीर होते है अपने वैवाहिक जीवन में भी अपना वर्चस्व बनाये रखना चाहते है। यही एक वजह है जिसके कारण ये अपने वैवाहिक जीवन में तालमेल नहीं बैठा पाते है।
5 – होते है सेल्फ मेड इंसान-
जिन लोगो का नाम अंग्रेजी के S अक्षर से शुरू होता है ये लोग सेल्फ मेड होते है ये लोग अपने बल पर सब कुछ पा लेते है ऐसे लोग दिखावे में बहुत यकीन करते है।
तो ऐसे होते है S अक्षर से नाम वाले इन्सान – अगर आपका नाम भी S अक्षर से आता है तो आप अपने बारे में बहुत कुछ समझ ही गये होंगे। वहीं जो लोग S अक्षर से नाम वाले इन्सान के सम्पर्क में है वो यहां पर उनका स्वभाव अच्छे से जान सकते है।
इस 1 मंत्र से शांत होते हैं शनिदेव, दिनभर में कभी भी करें जाप
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शनिवार के दिन शनिदेव की कृपा और आशीर्वाद में शुभ फल पाना चाहते हैं तो शनिवार को स्नानादि कर्मों से निवृत्त होकर किसी शनि मंदिर या नवग्रह मंदिर में जाएं।
यदि सुबह का समय हो तो अथि शुभ है और यदि आप सुबह के समय न जा पाएं तो संध्या के समय भई स्नानादि करके जा सकते हैं।
मंदरि में काले रंग का आसन बिछाएं और शनिदेव की मूर्ति के सामने बैठ जाएं। इसके बाद विधि अनुसार शनिदेव की पूजा करें।
यदि आप मंदिर या घर दोनों जगह शनिदेव की पूजा करने में सक्षम न हों तो लकड़ी की चौकी पर काला कपड़ा बिछाएं और उस पर शनिदेव की फोटो रखें, फिर उसके सामने बैठकर शनिदेव की पूजा करें।
पूजा के समय ध्यान रहे कि अपना मुंह पश्चिम दिशा की ओर रखें। इसके बाद शनिदेव को तेल, काले तिल, उड़द, नीले फूल, काला वस्त्र आदि चढ़ाए। किसी भी व्यजंन का भोग लगाएं। इसके बाद शनि मंत्र का 108 बार जाप करें-
ॐ सूर्यपुत्रों दीर्घदेहोविशालाक्ष: शिवप्रिय:।मन्दचार प्रसन्नात्मा पीड़ा दहतु मे शनि:।।
आंख फड़कना इस बात की ओर करता है इशारा
आंख फड़कना इस बात की ओर करता है इशारा...
अंगों का फड़कना अमूमन हर किसी के साथ होता है। प्राचीन समय से ही अंगों के फड़कने को लेकर तमाम तरह के आकलन भी हैं। ज्योतिष में शरीर के हर अंग के फड़कने को लेकर फल जुड़ा हुआ है। आज जानिए, आंख फड़कने के क्या हैं मायने। आगे की स्लाइड में जानें क्या होता है आंख फड़कने का मतलब:
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(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
ज्योतिष के अनुसार आंख फड़कना मतलब
महिला हो या पुरुष आंख सबसे अधिक फड़कती है। यदि दायीं आंख ऊपर की ओर के फलक में फड़कती है तो धन एवं कीर्ति की वृद्धि होती है। नौकरी में पदोन्नति होती है। यदि नीचे का फलक फड़कता है तो अशुभ घटना घटित होने की आशंका रहती है।
बाईं आंख का उपरी फलक फड़कने पर शत्रुता बढ़ती है। नीचे का फलक फड़कता है तो किसी से बिना वजह बहस हो सकती है या फिर अपमान सहना पड़ सकता है।
बाईं आंख की नाक की ओर का कोना फड़के तो शुभ होता है। पुत्र प्राप्ति का संदेश मिल सकता है। ऐसा होने पर किसी प्रिय व्यक्ति से मुलाक़ात भी संभव है।
दांयी आंख फड़कना भी अच्छा होता है। लेकिन महिला की दांयी आंख फड़कना अशुभ माना जाता है।
दोनों आंख एकसाथ फड़क का फल महिला-पुरुष दोनों में समान होता है। ऐसा होने पर किसी बिछुड़े मित्र से मुलाकात हो सकती है।
पीछे की ओर दाईं आंख का फड़कन अच्छा नहीं होता। बाईं आंख ऊपर की ओर फड़के तो फल शुभ होता है। स्त्री की बाईं आंख फड़कना शुभ माना जाता है।
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
हम आपके कमैंट्स का इंतज़ार कर रहें हैं
रत्न और राशि दोनों में से क्या पहनना है आपके लिए सबसे बेहतर
चंद्रमा चिन्ह या राशि एक ऐसा चिन्ह है जिसे जन्म के दौरान चंद्रमा को रखा जाता है, जो वैदिक ज्योतिष के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। शायद आपको पता होगा कि यह आपके कुंडली के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है। जो आपके व्यक्तित्व और प्रकृति को निर्धारित करती है। इसके अलावा, आप कुछ निश्चित कारकों को भी समझेंगे जो आपके राशि को अच्छी तरह से पढ़ कर आपके जीवन की दिशा को निर्धारित करते हैं।
रत्नों का महत्व
यदि आप अपने जीवन में ग्रहों के प्रभावों को निर्धारित करने के लिए कुछ देख रहे हैं, तो इसके लिए सबसे जरूरी चीज़ें हैं रत्न के संदर्भ को समझना। हालाँकि, सीधे शब्दों में कहें तो कुछ ऐसे विशेष रत्न शामिल हैं जिसे सही तरीके से अगर पहना जाता है, तो यह आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा को प्रदान करने में आपकी मदद करता है। ऐसे नीचे इसकी इसकी सूची दी गई है, जिसमें आप अपने राशि के अनुसार आपके लिए कौन से रत्न सबसे अच्छे हैं उसका चुनाव आप आसानी से कर सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल है
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मून साइन और जेमस्टोन
आपके रत्न पहनने की जटिलताओं को रोकना नहीं है, बल्कि उन पर चंद्रमा से मेल खाता पत्थर हो। हालाँकि, इसे पहनने के लिए सप्ताह में कुछ विशेष दिन भी होते हैं, जब आपको उन्हें अपने विशेष उंगलियों में पहनना पड़ता है, ताकि आपके जन्म के चंद्रमा के संकेतों का इस्तेमाल किया जा सके।
मेष के लिए लाल कोरल
मेष ग्रह चंद्रमा यानि कि मंगल ग्रह द्वारा शासित चिन्ह है। लाल मूंगा वैदिक ज्योतिष में पहचाने जाने वाले संबंधित रत्न हैं। लाल मूंगा को अपनी अंगूठी पर मंगलवार को पहना जाना चाहिए, जिसे अनामिका कहते हैं।
वृषभ और हीरे
वृषभ वैदिक ज्योतिष में संदर्भित हैं, जो शुक्र के स्वामित्व हैं। हीरा एक ऐसा रत्न है जो इस ज्योतिषीय बाहुल्य की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। इसे शुक्रवार के दिन मध्य उंगली (माधमा) में पहनना शुभ माना जाता है।
मिथुन के लिए पन्ना
मिथुन ग्रह बुध के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका प्रतिनिधित्व रत्न पन्ना है। इस रत्न को बुधवार के दिन पहना जाना चाहिए, ताकि आप सही ऊर्जा पर कब्जा कर सकें। इसके साथ ही इसे छोटी उंगली में पहनें, जिसे कनिष्ठ कहते हैं।
मोती और कैंसर
कैंसर या कर्क चंद्रमा द्वारा शासित हैं। ऐसे में, मोती ज्योतिष के संयोजन का प्रतिनिधित्व करते हैं औरह ही इसे सोमवार के दिन पहनना अच्छा माना जाता है। इसे आप अपनी छोटी उंगली पर धारण करें।
लियो, सूर्य और रूबी
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सिंह, शेर या लियो का स्वामी सूर्य हैं। इस संयोजन को रूबी में रखा जाता है, साथ ही इस समय में पैदा हुए लोगों के लिए यह सबसे आदर्श रत्न माना जाता है। रूबी को रविवार के दिन रिंग फिंगर में पहना जाना चाहिए।
कन्या के लिए पन्ना
कन्या का गृह बुध होता है। ऐसे में, कन्या राशि के जातकों को पन्ना रत्न धारण करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर पन्ना रत्न इनके लिए अशुभ फलदायी माना जाता है। जिसे आप, बुधवार के दिन कनिष्ठ या छोटी उंगली में धारण कर सकते हैं।
लिब्रा और डायमं
ड्सलिब्रा या तुला वीनस (शुक्रा) के साथ जुड़ा हुआ होता है। इस राशि के लोग हीरा धारण कर सकते हैं। इसे आप शुक्रवार के दिन मध्य ऊँगली में पहन सकते हैं।
वृश्चिक, मंगल और कोरल
वृश्चिक ग्रह मंगल ग्रह के स्वामित्व वाले होते हैं। वेदिक ज्योतिष के अनुसार, जो इस सन्दर्भ के तहत पैदा हुए हैं उन्हें कोरल रत्नों को अपनाना चाहिए। शनिवार के दिन रिंग फिंगर में अंगूठी को पहनकर इस सकारात्मक ऊर्जा के लाभों का आनंद लें।
धनु और पीला नीलमणि
बृहस्पति या बृहस्पति द्वारा शासित चिन्ह, धनु राशि को पीले नीलमणि रत्न द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है।
इस पत्थर को पहनने का सबसे अच्छा दिन गुरुवार है। इसे अपनी तर्जनी ऊँगली में पहनें।
मकर, शनि और ब्लू नीलम
मकर या कुम्भ एक ग्रह है जिसे शनि द्वारा शासित किया जाता है। यदि आप इस राशि में पैदा हुए हैं तो आपके लिए ब्लू नीलम सबसे बेहतर है। इसे आप शनिवार के दिन मध्यमा (मिडिल फिंगर) में पहनें।
कुंभ और ब्लू नीलमणि
कुंभ राशि या मकर एक ऋषि है जिसे ग्रह शनि द्वारा दर्शाया गया है, जिसका ऊर्जा नीला नीलम में प्रवाहित है। इसे शनिवार के दिन अपनी मध्य उंगली में पहनकर सकारात्मक ऊर्जा का आनंद लें।
मीन, बृहस्पति और पीला नीलम
मीन राशि बृहस्पति के स्वामित्व होते हैं। इस चन्द्रमा के संकेत के लिए पीले रत्न नीलम या पुखराज है। इसे बृहस्पतिवार के दिन तर्जनी ऊँगली में पहनें
लाल किताब के अनुसार आइए अपनी कुंडली खुद बनाएं..
लाल किताब को प्रचलित ज्योतिष ज्ञान से हटकर व्यावहारिक ज्ञान माना जाता है। लाल किताब के विशेषज्ञों अनुसार वैसे तो कुंडली की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे फिर भी सुविधानुसार कुंडली देखकर समाधान कर देते हैं। समस्या से ही पता चलता है जातक कौन-से ग्रह से पीड़ित है, तब उक्त ग्रह के दोष को दूर कर दिया जाता है।
वेबदुनिया में खास:
लाल किताब में दो प्रकार से कुंडली बनाई जाती है। पहले प्रकार में हाथ की रेखा, पर्वत, भाव, राशि का निरीक्षण और निशानों को जांच परखकर कुंडली बनाई है और दूसरे प्रकार में प्रचलित ज्योतिष शास्त्र की पद्धति द्वारा बनी हुई कुंडली को परिवर्तित करके नई कुंडली बनाई जाती है।
हालांकि लाल किताब के जानकार कुंडली बनाने से पूर्व जातक की वर्तमान परेशानियों तथा अतीत के घटनाक्रम को जानकर ही कुंडली की विवेचना कर फलकथन करते हैं और उपाय बताते हैं। यहां प्रस्तुत है लाल किताब अनुसार कुंडली बनाने की विधि।
हाथ की रेखाओं के द्वारा :
पर्वत : हाथ पर अंगूठे और अंगुलियों की जड़ों में बने पर्वत जैसे अंगूठे के नीचे बना शुक्र और मंगल का पर्वत। पहली अंगुली के नीचे बना गुरु का पर्वत। बीच की अंगुली के नीचे बना शनि का पर्वत। अनामिका (रिंग फिंगर) के नीचे बना सूर्य पर्वत। सबसे छोटी अँगुली के नीचे बना बुध पर्वत। हाथ के अन्त में बना चंद्र पर्वत और खराब मंगल का पर्वत। जीवन रेखा की समाप्ति स्थान कलाई के ऊपर पर बना राहु पर्वत आदि यह सभी हाथ में ग्रहों की स्थिति बताते हैं।
राशियां :
1. राशियों के लिए तर्जनी का प्रथम पोर मेष, दूसरा वृषभ और तीसरा मिथुन राशि का होता है।
2. अनामिका का प्रथम पोर कर्क, दूसरा सिंह और तीसरा कन्या राशि का माना जाता है।
3. बीच की अंगुली का प्रथम पोर तुला, दूसरा वृश्चिक और तीसरा पोर धनु राशि का माना जाता है।
4. सबसे छोटी अंगुली का प्रथम पोर मकर, दूसरा कुम्भ और तीसरा मीन राशि का माना जाता है।
भाव या खाने :
हथेली पर बारह भाव या खाने अलग-अलग प्रकार से होते हैं।
1. पहला खाना सूर्य पर्वत के पास।
2. दूसरा खाना गुरु पर्वत के पास।
3. तीसरा खाना अंगूठे और तर्जनी अंगुली की बीच वाली संधि में।
4. चौथा खाना सबसे छोटी अंगुली के सामने हथेली के आखिर में।
5. पांचवां खाना बुध और चंद्र पर्वत के बीच में।
6. छठवां खाना हथेली के मध्य में।
7. सातवां खाना बुध पर्वत के नीचे।
8. आठवां खाना चंद्र पर्वत के नीचे।
9. नवां खाना शुक्र और चंद्र पर्वत की बीच में।
10. दसवां खाना शनि पर्वत के नीचे।
11. ग्यारहवां खाना खराब मंगल और हथेली के बीच में।
12. बारहवां खाना शुक्र पर्वत और हथेली के बीच में जीवन रेखा के नीचे होता है।
अन्य निशान :
1. हथेली में सूर्य का निशान सूर्य के समान दिखाई देता है।
2. चंद्र का निशान तारे की तरह नजर आता है।
3. शुभ मंगल का निशान चतुर्भुज के समान होता है।
4. अशुभ मंगल का निशान त्रिभुज के रूप में होता है।
5. बुध का निशान गोलाकार समान होता है।
6. गुरु का निशान किसी ध्वज की तरह होता है।
7. शुक्र का निशान समान्तर में बनी दो लहराती हुई रेखाओं-सा होता है।
8. शनि का निशान धनु के आकार का होता है।
9. राहु का निशान आड़ी-तिरछी रेखाओं से बना जाल-सा होता है।
10. केतु का निशान लम्बी रेखा के नीचे एक अर्धवृत्त-सा होता है।
इस रत्न को पहनने से दूर भागती हैं आसमानी ताकतें, हाेते हैं और भी कई फायदे
जब भी मनुष्य की कुण्डली में ग्रहों की चाल ठीक नही होती तो उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। ऐसे में ज्योतिषशास्त्र में रत्न पहन कर ग्रहों के बुरें प्रभाव का कम दिया जाता है। ऐसे ही एक रत्न है फिरोजा जिसको पहनने सें कुंडली में ग्रहों के दोषों को दूर किया जा सकता है।
क्या आपको पता है तांबे का कड़ा पहनने के ये चमत्कारी फायदे..
जिस तरह ज्यादा पानी पीना अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी होता है, उसी तरह तांबे का कड़ा पहनना हमरे लिए बेहद फायदेमंद होता है, जिससे कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है| अक्सर अपने देखा होगा कि कई लोग अपने हाथों में कड़ा पहनते हैं| तांबे का कड़ा ना केवल फैशन को दर्शाता हैं बल्कि यह आपके स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखता हैं| चलिए जानते हैं इसके फायदे….
तांबे का कड़ा शरीर के जोड़ों या गठिया से संबंधित परेशानियों को दूर करता है| और बताया जाता है कि आर्थराइटिस के मरीजों को ऐसा कड़ा जरूर पहनना चाहिए|
बढ़ती उम्र के साथ घुटनों में दर्द होना एक आम परेशानी है, लेकिन अगर आप तांबे का ब्रेसलेट पहनेंगे तो आपको इससे राहत मिल सकती है|
दिल को लम्बे समय तक स्वस्थ और सही रखने के लिए और साथ ही दिल से जुडी कई बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं तो कॉपर ब्रेसलेट ज़रूर पहनें|
तांबे का कड़ा बाक़ी अन्य मेटल के टॉक्सिक इफ़ेक्ट को कम करता है और हीमोग्लोबिन बनाने वाले एंजाइम की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है|
तांबे में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी अधिक होती है बताया जाता है कि इसके आभूषण पहनने से बढती उम्र का असर कम होता है| इसे पहनने से आपका लुक भी बेहतर नज़र आता है|
पथरी को जड़ से खत्म करने का रामबाण इलाज है पत्थरचट्टा
पथरी का प्राकृतिक इलाज :-
आयुर्वेद की दुनिया में भष्मपथरी, पाषाणभेद और पणपुट्टी के नाम से फेमस पत्थरचट्टा मानव शरीर के किसी भी भाग में हुए पथरी को खत्म कर सकता है। मेडिकल साइंस में इसे ब्रायोफील्लुम पिन्नाटम भी कहा जाता है।
पत्थर चट्टा का पौधा :-
पत्थर चट्टा का पौधा खाने में खट्टा और नमकीन होता है। यह स्वाद में भी स्वादिष्ट भी है।
पत्थर चट्टा उगाने का तरीका
आप इसके पत्तों को किसी भी तरह की जमीन के अंदर डाल दें। यह उस जगह पर उग जाता है। पत्थर चट्टा की तासीर बहुत ही सामान्य होती है। इसलिए हर मौसम में आप इसका सेवन कर सकते हैं।
कैसे प्रयोग करें
पत्थरचट्टा के दो पत्तों को तोड़कर उसे अच्छे से पानी में साफ कर लें और सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ इसका सेवन करें। नियमित इस्तेमाल करने से थोड़े ही दिनों में आपके शरीर में मौजूद पथरी टूट कर शरीर से बाहर निकल जाएगी। आप पत्थर चट्टा के पत्तों को चबाकर या इसकी पकौड़े बनाकर भी सेवन कर सकते हैं। पत्थरचट्टा के रस में आप सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करें। इससे पेट में होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है।
यदि पित्ताशय की पथरी हो तो इसे उपयोग करने का तरीका :-
अजवायन के 10 पत्तों और पत्थरचट्टा के 10 पत्तों को पीसकर पेस्ट बना लें और इसमें एक चम्मच गोखरू (आसानी से बाजार में मिल जाएगा) मिला दे और सुबह खाली पेट लगातार तीन दिनों तक सेवन करें। इसके सेवन के बाद आपको दस्त और उल्टियां भी लग सकती हैं लेकिन इसकी चिंता न करें।
पेशाब के रास्ते मे पथरी हो तो उपयोग करने का तरीका :-
एक गिलास पानी में पथरचटा के 10 पत्तों को उबालकर काढ़ा बना लीजिए। इस काढ़े को रोज सुबह खाली पेट सेवन करें। इस विधि से 15 दिनों के अंदर ही पथरी टूट जाएगी और मूत्र मार्ग से पथरी बाहर आ जाएगी।
अन्य फायदे :-
मूत्र संबंधी जितने भी रोग होते हैं उसमें भी पत्थरचट्टा बेहद लाभदायक दवा है। इससे पेशाब की जलन व पुरूषों में होने वाली प्रोस्टेट की समस्या भी ठीक होती है। महिलाओं में वाइट डिस्चार्ज और पेशाब में जलन की समस्या भी पत्थर चट्टा के सेवन से ठीक हो जाती है।
सावधानियां व परहेज :-
इस औषधि का सेवन करते समय चूना, बिना साफ किये हुए फल और अधिक चावल आदि का सेवन न करें।
घर में बरकत लाता है ये चमत्कारी रत्न
सुलेमानी हकीक को चमत्कारी रत्न कहा जाता है। यह रत्न एक ऐसा रत्न है जो तीन ग्रहों शनि, राहु और केतु के दोष दूर करता है। इसके अतिरिक्त ये आपको बुरी नजर से भी बचाता है। वहीं आपके व्यवसाय और नोकरी में आ रही अड़चने भी दूर करता है।
अगर आपके घर में बरकत नहीं हो रही हो तो भी आप सुलेमानी हकीक रत्न पहन सकते है इससे आप के घर में गरीबी दूर हो जाएगी और बरकत होने लगेगी।
इस रत्न को धारण करने का तरीका
आप शनिवार के दिन मध्यमा उंगली में धारण कर सकते है। इसे आपको गोमूत्र से धो कर पहनना चाहिए। अगर आप चांदी की अंगूठी में धारण करना चाहते है तो सीधे हाथ में धारण करें। वहीं इसे आप चांदी के लॉकेट में भी गले में धारण कर सकते है।
ऐसा कहा जाता है की जिस किसी के भी कुंडली में अगर शनि, राहु व केतु का bad effect हो, तो उन लोगों को सुलेमानी stone पहनना चाहिए ।
जो लोग अक्सर बीमार रहते है, जिनकी सेहत हमेशा खराब रहती है जिसके वजह से वे शारीरिक तौर पर कमजोर हो जाते है उन्हें भी सुलेमानी stone पहनना चाहिए। इससे उनके health में काफ़ी सुधार आता है ।
ऐसे लोग जिस पर काला जादू कर दिया गया हो या फिर उस पर कोई टोटका या बुरी नज़र का साया हो उन्हें भी Sulemani hakik पहनना चाहिए । इसे पहनने से इंसान पर किया हुआ काला जादू ख़त्म हो जाता है साथ हीं ये हमेशा बुरी नज़र से बचा कर रखता है ।
किसी के भी business या service में अगर अड़चने आ रही हों तो उन्हें भी Sulemani gemstone पहनना चाहिए । इससे उसके काम में आने वाली सभी अड़चने दूर हो जाएँगे साथ हीं कम में बढ़ोतरी भी होगा ।
किसी भी कारण से अगर आपके घर में बरकत नही हो रहा हो तो भी आप सुलेमानी stone पहन सकते है इससे आपके घर की गरीबी दूर हो जाएगी और घर में बरकत होने लगेगी।
अगर आपको लगता है की आपके दुश्मन आप पर जादू टोना करवाता रहता है तो उससे बचने के लिए आप सुलेमानी stone को पहन सकते है । इसे पहनने से आप जादू टोना से तो बच हीं जायेंगे साथ हीं आपके दुश्मनो की शक्ति भी आपके निकट काम नहीं करेगी ।
अगर आपको भुत-प्रेत का भय अक्सर परेशान कर रहा हो तो आप सुलेमानी रत्न को जरुर से धारण करे ।
जो कोई भी इस stone को धारण करता है उनके तरफ सभी लोग attract होते जाते है ।
यह stone Physical and mental health को बेहतर बनाता है।
यह माना जाता है कि सुलेमानी stone बाल, दिल, गुर्दा, आंख व नाखून को मजबूत बनाता है।
जिन्हें अनिद्रा(insomnia) की problem है उनके लिए भी सुलेमानी stone फायदेमंद होता है।
यह stone नकारात्मक विचारों को दूर करने और बुद्धि को sharp बनाने में मदद करता है।
सुलेमानी stone भावनाओं और जुनून को control करने में help करता है।
जो सुलेमानी stone पहनता है उसका आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और होश में बढ़ोतरी होता है।
सुलेमानी पत्थर को कब और कैसे धारण करे / When and how should wear Sulemani ?
सुलेमानी stone को धारण करने के लिए इसे चांदी के लॉकेट में डाल कर नीले रंग धागे मे गुथ कर गले में पहन सकते है या फिर इसे अंगूठी बना कर भी पहन सकते है। इस stone को Saturday के दिन पहनना चाहिए। वैसे तो ये stone बहुत हीं सस्ता होता है लेकिन इसे जागृत करना बहुत हीं मुश्किल होता है। अगर इसे पूरे विधि विधान के साथ धारण किया जाय तो इसका effect बहुत हीं सटीक, और तेज़ होता है।
जानें एक एक ताला कैसे खोल सकता है आपके किस्मत के दरवाजे, करें ये उपाय, बरसेगा धन
आपकी किस्मत के दरवाजे खोल सकता है ताला
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डर लगता है तो अपने तकिए के नीचे रखें.....
अगर आप स्टूडेंट हैं और पढ़ाई कर रहे हैं और सफलता पाना चाहते हैं तो अपने तकिए के नीचे किताब रखकर सोएं और मां सरस्वती के आगे दीपक जलाएंष
इसके अलावा अगर आपको जर लगता है या फिर आपको डरावने सपने आते हैं तो सुंदरकांड अपने तकिए के नीचे रखकर सोएं। लेकिन इससे पहले स्वच्छता का ध्यान रखें।
करें ताले का ये उपाय तो खुलेंगे किस्मत के दरवाजे
ज्योतिष की मानें तो अगर आपका कोई काम नहीं बनता और बिजनेस से लेकर करियर, पारिवारिक जीवन में समस्याएं ही समस्याएं आती हैं तो आप ताले का ये उपाय कर सकते हैंं। इसके लिए आप अच्छा मुहूर्त देखकर एक ताला खरीद कर लाएं और इसे रात को तकिए के नीचे रखें। सुबह नहा धोकर पूजा करने के बाद इसे शुद्ध करके चाबी समेत ताले को मंदिर में चुपचाप रख आएं या आप इसे दान भी कर सकते हैं। इसके बाद जैसे ही चाबी और ताला खुलेगा तो आपकी किस्मत का भी ताला खुल जाएगा।
बहुत शुभ होती है कछुए की अंगूठी, जानिए ये 5 फायदे
अक्सर लोग शुभ अशुभ के चक्कर में कई प्रकार की अंगूठियां अपने हाथों में पहन लेते हैं। जैसे मूंगा, पन्ना, हीरा या मोती। लेकिन कुछ एक ऐसे भी हैं जो कछुए की अंगूठी पहनते हैं। ऐसा पहनने के पीछे भी कई वजह है।
1. इसे पहनने से व्यक्ति में आत्मविश्वास दोगुना बढ़ जाता है। इसे लगातार पहने रहने से व्यापार में घाटा नहीं होता है और धन में बरकत होती है।
2. पौराणिक कथाओं के अनुसार, कछुआ भगवान विष्णु का (कच्छप) अवतार माना जाता है। कछुआ धैर्य, शांति, विजय का प्रतीक है। इसे पहनने से ये सभी लाभ होते हैं।
3. लक्ष्मी का उदभव भी लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से हुआ था इसलिए कछुआ लक्ष्मी जी का भी प्रिय माना जाता है।
4. कछुए की इस अंगूठी को पहनते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि कछुए के सिर वाला हिस्सा आपकी तरफ होना चाहिए।
5. यह भी माना जाता है कि इस अंगूठी को धारण करने से व्यक्ति में कछुए की भांति हर काम के प्रति धैर्य और साहस आता है। इससे वह सफलता की ओर बढ़ता है।
अनचाहे प्रेगनेंसी को कैसे रोके
क्या सचमुच ये आयुर्वेदिक पिल्स प्रेगनेंसी को रोकने के काम आता है?
अनचाहे प्रेगनेंसी को रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल तो आम है लेकिन इसके ब्रेक होने का डर जिनको सताता है वे पिल्स का इस्तेमाल करते हैं। सेक्स के 72 घंटे बाद अनचाहे प्रेगनेंसी को रोकने के लिए अगर बार-बार इसका इस्तेमाल किया गया तो इसके बहुत साइड इफेक्ट होने लगते है। यानि इसके कारण पीरियड्स होने में प्रॉबल्म,सेक्स की इच्छा में कमी और मनोवैज्ञानिक आचरण में भी प्रॉबल्म होता है। अगर आप इसके साइड इफेक्ट्स से बचना चाहते हैं तो आप इस आयुर्वेदिक तरीके का भी इस्तेमाल कर सकते है।
डॉ. सूर्या भागवती, डॉ. वैद्द न्यू एज आयुर्वेद ने कुछ ऐसे आयुर्वेदिक ओरल कंट्रासेप्टिव के बारे में बताया है जो आप घर में बना सकते हैं। ये हर्ब्स तीन तरीकों से प्रेगनेंसी को रोक सकते हैं-।
अरंडी का बीज- अरंडी किसी भी हर्बल स्टोर में आसानी से पाया जाता है। ये तकनीक कई प्रांतों में इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि विज्ञान भी इसको प्रामाणिकता देती है। इसके लिए आप ताजे अरंडी के बीज को फोड़े। उसमें से एक सफेद रंग का बीज निकलेगा। सेक्स करने के 72 घंटे में लेने से ये इमरजेंसी पिल्स के रूप में काम करता है।
सूखा पुदीना का पत्ता-आयुर्वेद के अनुसार पुदीना का पत्ता गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है। सेक्स करने के तुरन्त बाद गुनगुने गर्म पानी में एक चम्मच पुदीने के पत्ते मिलाकर लेने से ये नैचुरल गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है।
जपाकुसुम- जपाकुसुम में बेन्जीन होता है जो गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है। इस फूल का पेस्ट बनाकर इसको लेने से ये असरदार रूप में प्रेगनेंसी को रोकने में मदद करता है।
विडंगा- विडंगा पेपरकॉर्न की तरह दिखने में लगता है। ये 83 प्रतिशत तक अनचाहे प्रेगनेंसी को रोकने में मदद करता है।
तालिस्पात्र- ये आयुर्वेदिक हर्ब तालिस्पात्र एबीस विबियाना के नाम से जाना जाता है और इसको ओरल कंट्रासेप्टिव के रूप काम करता है। ये हर्ब अंडे को गर्भाशय के दिवार में चिपकने नहीं देता है और प्रेगनेंट होने की संभावना को कम करता है।
अदरक- ये सूखा अदरक घरेलू नुस्खा है। इसका एन्टी इंफ्लैमटोरी इफेक्ट पीरियड को ठीक तरह से प्रवाहित करने में मदद करता है। इसके साथ ये कंट्रासेप्टिव पिल्स के रूप में भी काम करता है।
सोमवार, 10 जुलाई 2017
परेशानियां दूर करने व कार्य सिद्धि हेतु उपाय
......यह उपाय विशेष रूप से शनिवार को ही करना है....
शनिवार को प्रातः अपने काम पर जाने से पहले, एक बेदाग नींबू लें और उसे लेकर घर के आस पास के किसी चौराहे पर जाए। चौराहे पर खड़े होकर मुख दक्षिण दिशा की और कर के निम्बू के दो टुकड़े करें। एक टुकड़े को आगे की तरफ फेंके, दूसरे को पीछे की तरफ। नींबू को फेंक कर घर वापिस आ जाएं या काम पर चले जाएं। दिन भर आपके काम बनते रहेंगे तथा परेशानियां भी दूर होंगी।
तंत्र, मंत्र, ग्रह बाधा और नजरदोष से छुटकारा पाने के उपाय......
तंत्र, मंत्र, ग्रह बाधा और नजरदोष से छुटकारा पाने के लिए मंगलवार को हनुमान जी को बुंदी के लड्डू चढ़ा कर अधिक से अधिक लोगों को अर्पित करें।
* तुलसी के पत्ते के साथ जो भी भक्त हनुमान जी को लड्डुओं का भोग लगाता है उसकी सभी समस्याओं का निवारण हो जाता है।
नजरदोष से बचने के लिए शनिवार और मंगलवार को बूंदी के लड्डू प्रयोग में लाएं व नजर उतारने के बाद उसे कुत्ते को खिला दें।
* भूत-प्रेत बाधा से ग्रस्त व्यक्ति से बूंदी का लड्डू उतारकर चैराहे या पीपल के नीचे रखें (रविवार छोड़कर)। तीन दिन लगातार इस उपाय को करें।
हनुमान जी को बुंदी के लड्डू बहुत प्रिय हैं। उससे नवग्रह भी शांत होते हैं। बुंदी के गोल-गोल लड्डूओं में नवग्रह को नियंत्रण करने की क्षमता है। बुंदी का गोल आकार बुद्ध, रंग बृहस्पति और सूर्य, सुगंध चन्द्रमा, मेवे शुक्र, मिठास मंगल की एवं छोटे-छोटे दाने राहू-केतू और शनि को नियंत्रित करते हैं।
* मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी को बुंदी के लड्डू चढ़ा कर मंदिर में ही वितरित कर दिए जाएं तो मनभावन जीवनसाथी के साथ विवाह की इच्छा पूर्ण होती है विशेषकर प्रेम विवाह में सफलता प्राप्त होती है।
शनिवार को प्रातः अपने काम पर जाने से पहले, एक बेदाग नींबू लें और उसे लेकर घर के आस पास के किसी चौराहे पर जाए। चौराहे पर खड़े होकर मुख दक्षिण दिशा की और कर के निम्बू के दो टुकड़े करें। एक टुकड़े को आगे की तरफ फेंके, दूसरे को पीछे की तरफ। नींबू को फेंक कर घर वापिस आ जाएं या काम पर चले जाएं। दिन भर आपके काम बनते रहेंगे तथा परेशानियां भी दूर होंगी।
तंत्र, मंत्र, ग्रह बाधा और नजरदोष से छुटकारा पाने के उपाय......
तंत्र, मंत्र, ग्रह बाधा और नजरदोष से छुटकारा पाने के लिए मंगलवार को हनुमान जी को बुंदी के लड्डू चढ़ा कर अधिक से अधिक लोगों को अर्पित करें।
* तुलसी के पत्ते के साथ जो भी भक्त हनुमान जी को लड्डुओं का भोग लगाता है उसकी सभी समस्याओं का निवारण हो जाता है।
नजरदोष से बचने के लिए शनिवार और मंगलवार को बूंदी के लड्डू प्रयोग में लाएं व नजर उतारने के बाद उसे कुत्ते को खिला दें।
* भूत-प्रेत बाधा से ग्रस्त व्यक्ति से बूंदी का लड्डू उतारकर चैराहे या पीपल के नीचे रखें (रविवार छोड़कर)। तीन दिन लगातार इस उपाय को करें।
हनुमान जी को बुंदी के लड्डू बहुत प्रिय हैं। उससे नवग्रह भी शांत होते हैं। बुंदी के गोल-गोल लड्डूओं में नवग्रह को नियंत्रण करने की क्षमता है। बुंदी का गोल आकार बुद्ध, रंग बृहस्पति और सूर्य, सुगंध चन्द्रमा, मेवे शुक्र, मिठास मंगल की एवं छोटे-छोटे दाने राहू-केतू और शनि को नियंत्रित करते हैं।
* मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी को बुंदी के लड्डू चढ़ा कर मंदिर में ही वितरित कर दिए जाएं तो मनभावन जीवनसाथी के साथ विवाह की इच्छा पूर्ण होती है विशेषकर प्रेम विवाह में सफलता प्राप्त होती है।
गुरुवार के दिन करें ये छोटा सा काम मिलेगी मनचाही नौकरी
हर किसी की चाहत होती है कि वह एक ऐसी नौकरी करे जिसमें अच्छे पैसे के साथ-साथ उसकी तरक्की भी हो।लेकिन कभी-कभी आपकी कुंडली में गुरु ग्रह दोष होता है जिसके कारण आपको नौकरी मिलने में परेशानी होती है और इसी के साथ ही आपको शादी और भाग्य में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड सकता है। अगर आपके जीवन में ऐसी मुश्किलें उत्पन्न हो रही है तो इनका समाधान करने के लिए गुरुवार का दिन आपके लिए शुभ हो सकता।
गुरूवार का दिन भगवान् बृहस्पति का दिन माना जाता है। भगवान् बृहस्पति सभी देवताओं के गुरू हैं, कैसी भी समस्या हो ये सभी का समाधान करते हैं। तो गुरूवार के दिन गुरु का एक सरल मंतर जाप करने से आप अपनी राह में आने वाली सभी अड़चनों को दूर कर सकते है। जानिए कुछ ऐसे उपाय जिनसे आप अपने ग्रह दोष दूर कर सकते है।
गुरुवार व्रत विधि :-
इस दिन सुबह उठकर सबसे पहले भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत करने का संकल्प लें। इसके पश्चात स्नान आदि करने के बाद पीले रंग के वस्त्र पहने और पीले रंग के वस्त्र पर गुरु बृहस्पति की प्रतिमा को रखकर पंचामृत स्नान कराएं। स्नान के बाद गंध, अक्षत, पीले फूलों से भगवान की पूजा करें। पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल से बने पकवान, गुड़, हल्दी या पीले फलों का भोग लगाएं।
इस दिन भगवान बृहस्पति के मंत्र ऊँ बृं बृहस्पते नम: का जाप करके आरती अवश्य करें। इसके पश्चात क्षमा प्रार्थना कर मनोकामना पूर्ति हेतु प्रार्थना करें।दरअसल गुरुवार के दिन व्रत-पूजा से गुरु ग्रह की कृपा से सुख-समृद्धि मिलती है। इसके साथ-साथ गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का प्रयोग करें, पीले चन्दन से पूजा तथा पूजा के बाद कथा अवश्य सुनें। इस दिन एक ही समय भोजन करें और ध्यान रहे, भोजन में पीले चने की दाल आदि का ही प्रयोग करें।परन्तु भोजन में नमक का प्रयोग कदापि न करें।
गुरुवार व्रत का फल :-
इस व्रत को करने से बृहस्पति देव प्रसन्न होते हैं और धन-धान्य, पुत्र, विद्या समेत सभी मनवांछित फलों की प्राप्ति होती है। परिवार को सुख-शान्ति मिलती है। इसलिए इस व्रत को सर्वश्रेष्ठ और अति फलदायक कहा गया है। इस व्रत में केले का पूजन करना चाहिए। कथा और पूजन के समय तन-मन, कर्म, वचन से शुद्ध होकर अपनी इच्छा को बृहस्पतिदेव से पूरी करने की प्रार्थना करनी चाहिए। उन इच्छाओं को बृहस्पतिदेव अवश्य पूर्ण करते हैं ऐसा मन में दृढ़ विश्वास रखना चाहिए।
क्या आपके घर की दीवार घड़ी तो नहीं लगी इस दिशा में, जो आपको दे रही हैं नुक्सान
हमेशा लोग बिना सोचें समझे घर में दिवार घड़ी को कहीं भी लगा देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा हैं कि वास्तुशास्त्र के हिसाब से ये सही हैं या गलत। बता दें वास्तुशास्त के हिसाब से घर में रखी हर चीज की जगह होती है। वास्तु के हिसाब से घर की दीवार घड़ी को रखने की दिशा, जगह, आदि तय होती है। वास्तु के मुताबिक इन स्थानों पर और इस दिशा में दीवार रखने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। आइये जानते है वास्तुशास्त्र के हिसाब से घर की दीवार घड़ी को कहां लगाना ठीक रहेगा, और कहां लगाना नुकसानदाक-
घर में दीवार घड़ी को हमेशा उत्तर और पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। बता दें वास्तुशास्त्र में पूर्व की दिशा को भगवान का स्थान माना जाता है।
दक्षिण दिशा में दीवार की घड़ी को भूलकर भी न लगाएं यदि आप दक्षिण दिशा में घड़ी लगाते है तो बार-बार ध्यान दक्षिण दिशा में जाएगा। इस दिशा से नकारात्मक ऊर्जा आती है।
घर में कभी भी ऐसी घड़ी न लगाएं जिसका समय रुका हुआ हों यानि यदि आपकी घड़ी खराब हो तो तुरंत बदल दें। इससे आपक समय भी रुक जाता है।
टूटे हुए शीशे वाली घड़ी घर में रखने से परिवार के सदस्यों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
इस तरह से कीजिए हनुमान चालीसा का पाठ,खुल जाएंगे किस्मत के बंद दरवाज़े
दिलेर समाचार, हनुमान जी को एक ऐसे देवता मानते हैं। जो अपने भक्तों से जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष करने की आवश्यकता नहीं हैं। वो केवल हनुमान चालीसा के पाठ से ही प्रसन्न हो जाते हैं।
अगर आप भी जाने वालें हैं हरिद्वार तो ये खबर सिर्फ आपके लिए है
जो लोग शनि की साढ़े साती या ढै्यया से परेशान हैं। वो हनुमान चालीसा का पाठ करके इन संकटों और परेशानियों से मुक्ति पा सकते हैं। माना जाता है कि शनि देव हनुमान जी के भक्तों को परेशान नहीं करते हैं।
हनुमान चालीसा का पाठ करने का सबसे अच्छा समय सुबह और रात को माना जाता हैं। ज्योतिषियों के अनुसार अगर रात के समय हनुमान चालीसा के पाठ आठ बार किये जाए तो सारे पापों से मुक्ति मिल जाती हैं। साथ ही घर या व्यापार में पैसो की तंगी भी नहीं रहती हैं।
अगर कोई मंगलवार और शनिवार को नित्य कर्म से निवृत होकर हनुमाना चालीसा के पाठ करता हैं। तो वो व्यक्ति अपने जीवन में कभी कष्ट नहीं पाता हैं। उस पर हमेशा सभी देवताओं की कृपा बनी रहती हैं
मनोकामना पूर्ति के लिए कल करें ये काम
ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी का जन्म मंगलवार को हुआ अतः मंगलवार के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। सुंदरकांड के पाठ से बहुत ही जल्द हनुमान जी प्रसन्न हो जाते हैं। सुंदरकांड में हनुमानजी के बल, बुद्धि, पराक्रम व शौर्य का वर्णन किया गया है। मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ तो करना ही चाहिए इसके साथ ही इस दिन हनुमानजी को प्रसन्न करने के लिए निम्न कार्य करने चाहिए....
जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। इसलिए मंगलवार को हनुमानजी के मंदिर में जाकर उन्हें सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें और अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना करें। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उससे हनुमानजी प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़ाएं। ऐसा करने पर हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं और साधक की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
मंगलवार के दिन भगवान राम की विशेष पूजा करें। राम हनुमानजी के आदर्श देवता हैं।
जिस प्रकार विवाहित स्त्रियां अपने पति या स्वामी की लंबी उम्र के लिए मांग में सिंदूर लगाती हैं, ठीक उसी प्रकार हनुमानजी भी अपने स्वामी श्रीराम के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर लगाते हैं। इसलिए मंगलवार को हनुमानजी के मंदिर में जाकर उन्हें सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें और अपनी मनोकामना पूर्ति की कामना करें। जो भी व्यक्ति हनुमानजी को सिंदूर अर्पित करता है उससे हनुमानजी प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान मंदिर में बजरंग बली की प्रतिमा पर चोला चढ़ाएं। ऐसा करने पर हनुमानजी अति प्रसन्न होते हैं और साधक की हर मनोकामना पूरी करते हैं।
मंगलवार के दिन भगवान राम की विशेष पूजा करें। राम हनुमानजी के आदर्श देवता हैं।
मंगलवार शाम यहां बांधे काला धागा, बढ़ेगी दौलत, कटेगा संकट.
मंगलवार शाम यहां बांधे काला धागा, बढ़ेगी दौलत, कटेगा संकट.
हनुमान माना जाता है कि काला रंग नकारात्मकता की निशानी है. किसी भी शुभ काम में इस रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है. लेकिन ये भी सच है कि काला रंग हमें बुरी नजर से बचाता है.
आइये जानते हैं कि काला रंग कैसे संकट दूर कर सकता है.
1. किसी काम में बार-बार रुकावट आ रही है या धन-दौलत में लगातार कमी आ रही है तो मंगलवार की शाम को काले रंग का धागा खरीदकर हनुमान जी के मंदिर ले जाएं.
2. हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और इसी दौरान काले धागे में नौ गांठ लगा लें.
3. एक बार गांठ लग जाए तो अब उसमें हनुमान जी के चरणों का सिंदूर लगाएं.
4. अब जय सियाराम का जाप करते हुए इस धागे को घर ले आएं.
5. अब इस धागे को मुख्य दरवाजे पर बांध दें.
मां की पूजा में भूलकर भी ना करें ये काम...
6. ऐसा करने से घर से घर में भूत-प्रेत, बुरी नजर, दुश्मन, बीमारी का प्रवेश नहीं होगा. बजरंगबली स्वयं रक्षा करेंगे.
7. इस धागे को यदि तिजोरी पर बांध दें तो धन बढ़ता रहेगा
हनुमान माना जाता है कि काला रंग नकारात्मकता की निशानी है. किसी भी शुभ काम में इस रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है. लेकिन ये भी सच है कि काला रंग हमें बुरी नजर से बचाता है.
आइये जानते हैं कि काला रंग कैसे संकट दूर कर सकता है.
1. किसी काम में बार-बार रुकावट आ रही है या धन-दौलत में लगातार कमी आ रही है तो मंगलवार की शाम को काले रंग का धागा खरीदकर हनुमान जी के मंदिर ले जाएं.
2. हनुमान जी की प्रतिमा के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और इसी दौरान काले धागे में नौ गांठ लगा लें.
3. एक बार गांठ लग जाए तो अब उसमें हनुमान जी के चरणों का सिंदूर लगाएं.
4. अब जय सियाराम का जाप करते हुए इस धागे को घर ले आएं.
5. अब इस धागे को मुख्य दरवाजे पर बांध दें.
मां की पूजा में भूलकर भी ना करें ये काम...
6. ऐसा करने से घर से घर में भूत-प्रेत, बुरी नजर, दुश्मन, बीमारी का प्रवेश नहीं होगा. बजरंगबली स्वयं रक्षा करेंगे.
7. इस धागे को यदि तिजोरी पर बांध दें तो धन बढ़ता रहेगा
हारी बाजी को भी जीता देते हैं चाणक्य के ये मंत्र
चाणक्य महान विद्वानों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ स्थान रखते हैं। उन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना करके अखण्ड भारत का निर्माण किया था। आचार्य चाणक्य एक बड़े दूरदर्शी विद्वान थे। चाणक्य की नीतियों में उत्तम जीवन का निर्वाह करने के बहुत से रहस्य समाहित हैं, जो आज भी उतने ही कारगर सिद्ध होते हैं। जितने कल थे। इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाने से बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है और साथ ही, उज्जवल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। चाणक्य के अनुसार जब भाग्य विपरीत हो तो आचार्य की इस बात पर अमल करना चाहिए।
दैवहीनं कार्य सुसाध्यमपि दु:साध्यं भवति।
भावार्थ: कभी-कभी किसी कार्य को अच्छा समझ कर प्रारंभ किया जाता है परन्तु यदि दैव अर्थात भाग्य विपरीत हो तो वह अच्छा कार्य भी लोक-निंदा का कारण बन जाता है, कष्ट देने वाला बन जाता है। यहां चाणक्य ने उसे कठिनाई देने वाला ही कहा है, उसे असंभव नहीं बताया है। अत: पुरुषार्थी व्यक्ति कठिन स्थितियों में भी कार्य को पूरा करने की सामर्थ्य रखते हैं।
दैवहीनं कार्य सुसाध्यमपि दु:साध्यं भवति।
भावार्थ: कभी-कभी किसी कार्य को अच्छा समझ कर प्रारंभ किया जाता है परन्तु यदि दैव अर्थात भाग्य विपरीत हो तो वह अच्छा कार्य भी लोक-निंदा का कारण बन जाता है, कष्ट देने वाला बन जाता है। यहां चाणक्य ने उसे कठिनाई देने वाला ही कहा है, उसे असंभव नहीं बताया है। अत: पुरुषार्थी व्यक्ति कठिन स्थितियों में भी कार्य को पूरा करने की सामर्थ्य रखते हैं।
भगवान शिव के 3 शक्तिशाली मंत्र
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ब्रह्मा के ट्रिनिटी का हिस्सा हैं, विष्णु महेश वह महेश विनाश का भगवान और दया का भी प्रतीक है। वह वह है जो भक्तों को मोक्ष देता है, जिसका मतलब है कि वे भक्तों को जन्म और मृत्यु के चक्र से राहत देते हैं। यह माना जाता है कि भगवान शिव आसानी से संतुष्ट हो सकते हैं भगवान शिव को समर्पित मंत्र मंत्रों हमें मुसीबतों को दूर करने और हमारी सुविधाओं से बचने में मदद करता है। शिव मंत्र हैं, जिन्हें जीवन से दुख, बीमारियों और परेशानियों को हटाने के लिए कहा जाता है।
शिव मंत्रों का जप करना
एक विश्वास है कि शिव मंत्र जप करके, कोई उसकी आंतरिक शक्ति और शक्ति को सुधार सकता है। जब कोई व्यक्ति इन मंत्रों को रोजाना मंत्र देता है, तो उसकी आत्मा सभी प्रकार की नकारात्मकता से शुद्ध हो जाती है और वह जीवन और मृत्यु के दुष्चक्र से बच जाते हैं।
ॐ नम शिवाय
यह सबसे असरदार शिव मंत्र है इस मंत्र का अर्थ है मैं भगवान शिव को अपना मस्तक झुकाता हूं भक्तों ने 108 बार इस मंत्र को अपनी आत्मा को शुद्ध करने और भगवान शिव द्वारा प्रदान करने के लिए मंत्र ग्रहण किया।
ॐ नमो भगवते रुद्राय
यह शिव मंत्र भगवान शिव को खुश करने के लिए सबसे अच्छा इस्तेमाल किया जाता है भगवान शिव से मदद लेने और उनकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भक्त इस रूद्रा मंत्र का जिक्र करते हैं
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात
शायद, गायत्री मंत्र अपने आप में सबसे शक्तिशाली मंत्र है। हालांकि, शिव गायत्री मंत्र भी बहुत शक्तिशाली है और मन की शांति लेने और भगवान शिव को खुश करने के लिए कहा गया है।
यह मंत्र ग्यारह मंत्र का एक संग्रह है। ये मंत्र भगवान शिव के विभिन्न रूपों की पूजा करने के लिए उपयोग किया जाता है ये मंत्र एक वर्ष में अलग अलग महीनों के लिए हैं, लेकिन एक साथ भी पढ़े जा सकते हैं। लोग शिवरात्रि में या महा रुद्र यज्ञ के दौरान इन सभी ग्यारह मंत्रों को पढ़ते हैं।
शिव मंत्रों का जप करना
एक विश्वास है कि शिव मंत्र जप करके, कोई उसकी आंतरिक शक्ति और शक्ति को सुधार सकता है। जब कोई व्यक्ति इन मंत्रों को रोजाना मंत्र देता है, तो उसकी आत्मा सभी प्रकार की नकारात्मकता से शुद्ध हो जाती है और वह जीवन और मृत्यु के दुष्चक्र से बच जाते हैं।
ॐ नम शिवाय
यह सबसे असरदार शिव मंत्र है इस मंत्र का अर्थ है मैं भगवान शिव को अपना मस्तक झुकाता हूं भक्तों ने 108 बार इस मंत्र को अपनी आत्मा को शुद्ध करने और भगवान शिव द्वारा प्रदान करने के लिए मंत्र ग्रहण किया।
ॐ नमो भगवते रुद्राय
यह शिव मंत्र भगवान शिव को खुश करने के लिए सबसे अच्छा इस्तेमाल किया जाता है भगवान शिव से मदद लेने और उनकी इच्छाओं को पूरा करने के लिए भक्त इस रूद्रा मंत्र का जिक्र करते हैं
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र प्रचोदयात
शायद, गायत्री मंत्र अपने आप में सबसे शक्तिशाली मंत्र है। हालांकि, शिव गायत्री मंत्र भी बहुत शक्तिशाली है और मन की शांति लेने और भगवान शिव को खुश करने के लिए कहा गया है।
यह मंत्र ग्यारह मंत्र का एक संग्रह है। ये मंत्र भगवान शिव के विभिन्न रूपों की पूजा करने के लिए उपयोग किया जाता है ये मंत्र एक वर्ष में अलग अलग महीनों के लिए हैं, लेकिन एक साथ भी पढ़े जा सकते हैं। लोग शिवरात्रि में या महा रुद्र यज्ञ के दौरान इन सभी ग्यारह मंत्रों को पढ़ते हैं।
जैसा कि हम सभी जानतें है कि हर आदमी बस अमीर बनना चाहता है लेकिन क्या आपको पता है सारी दुनिया के लोगों की सम्पति के बराबर ही कुछ अमीर लोगों की सम्पति है तो अगर आप भी अपने जीवन में सफल होना चाहते है या अमीर बनना चाहते है तो आपको सबसे पहले ये समझना होगा की आखिर उनमें और आपके काम करने के तरीके में बड़ा फर्क क्या है आज मैं आपको ऐसी तीन बातें बताऊंगा जो दुनिया के सभी बड़े अमर लोगों में एक जैसी है और आपमें भी वो बातें है तो आप भी एक दिन जरुर सफल हो जाओगे और नहीं है तो आपको उनकी आदत डाल लेनी चाहिए अगर आप भी बहुत ज्यादा पैसे वाले बनना चाहते हो |
1. मेरे प्यारे दोस्तों अमीर लोगों में पहली और सबसे बड़ी आदत ये होती है की उनके दिमाग बहुत से आईडिया आते रहते है अब आप कहोगे कि वो तो आपके दिमाग में भी बहुत से आते है लेकिन वो लोग उस आईडिया पर तुरंत करना शुरू कर देते है और आप बस यूँ ही सोचकर रह जाते है इसलिए कोई भी दिमाग में योजना बने तो उसपर तुरंत काम करना शुरू कर दें और अगर आप ऐसा करते है तो फिर आप सफलता की सीढी पर है |
2. दूसरी सबसे बड़ी बात ये है कि आपके दिमाग में कोई अच्छी सी योजना और आपने बिना किसी देरी के उसपर काम भी करना शुरू कर दिया लेकिन आप सफल नहीं पाए आपको निराशा हाथ लगी फिर आप कोई दूसरा काम शुरू कर दिया फिर असफल हो गये तो फिर आपका हौसला जवाब दे देता है लेकिन सफल और अमीर लोगों में ये क्षमता होती है कि वो कितनी भी बार असफल हो जाये फिर से नया फैसला लेने में समय नहीं गंवाते है वो कभी निराश नहीं होते है अब्राहम लिंकन कई बार चुनाव हारने के बाद भी अमरीका के राष्ट्रपति बने इसलिए आप कभी निराश मत हो क्यों की जरुरी नहीं की आपका हर काम आपको सफलता दिलाएगा अंदर से मजबूत बनो |
3. ये तीसरी और अंतिम आदत है जो अमीरों में होती है कि वो समय की कीमत को समझते है आपने सुना या पढ़ा भी होगा की समय की पैसा है तो वो अपना समय फालतू के काम में कभी नहीं गंवाते है हमेशा अपना एक एक एक सैकंड भी वो अपने उस काम में ही लगते है जो उनको पैसा कमाने में सहायक होता है अपने सपने को सच करने में लगाते है और हम अपना सारा समय सोशल मिडिया यारी दोस्ती में खर्च कर देते है तो अपने समय के महत्व को समझो और इसे व्यर्थ ना गंवाओ अगर आप भी समय का मूल्य समझते है तो आप एक दिन जरुर अमीर बनोगे |
ये तीन आदतें अगर आपके अंदर पहले से हैं तो बहुत ही अच्छी बात है और अगर नहीं है तो आज से ही डाल लें और देखना की आपको अमीर बनने से कोई नहीं रोक पायेगा अगर जानकारी अच्छी लगे तो लाइक और शेयर जरुर किजियेगा इसी तरह की पोस्ट पढ़ते रहने के लिए और हमसे जुड़ने के लिए मुझे फॉलो करें धन्यवाद् |
1. मेरे प्यारे दोस्तों अमीर लोगों में पहली और सबसे बड़ी आदत ये होती है की उनके दिमाग बहुत से आईडिया आते रहते है अब आप कहोगे कि वो तो आपके दिमाग में भी बहुत से आते है लेकिन वो लोग उस आईडिया पर तुरंत करना शुरू कर देते है और आप बस यूँ ही सोचकर रह जाते है इसलिए कोई भी दिमाग में योजना बने तो उसपर तुरंत काम करना शुरू कर दें और अगर आप ऐसा करते है तो फिर आप सफलता की सीढी पर है |
2. दूसरी सबसे बड़ी बात ये है कि आपके दिमाग में कोई अच्छी सी योजना और आपने बिना किसी देरी के उसपर काम भी करना शुरू कर दिया लेकिन आप सफल नहीं पाए आपको निराशा हाथ लगी फिर आप कोई दूसरा काम शुरू कर दिया फिर असफल हो गये तो फिर आपका हौसला जवाब दे देता है लेकिन सफल और अमीर लोगों में ये क्षमता होती है कि वो कितनी भी बार असफल हो जाये फिर से नया फैसला लेने में समय नहीं गंवाते है वो कभी निराश नहीं होते है अब्राहम लिंकन कई बार चुनाव हारने के बाद भी अमरीका के राष्ट्रपति बने इसलिए आप कभी निराश मत हो क्यों की जरुरी नहीं की आपका हर काम आपको सफलता दिलाएगा अंदर से मजबूत बनो |
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इस मंत्र के 9 बार उच्चारण करने से आपकी सारी मनोकामनाए पूर्ण हो जाएगी
महामृत्युन्ज्या मंत्र, शिव मंत्र एक अत्यंत प्रसिद्ध व्यक्ति हैं, जो आध्यात्मिक अभिमानियों द्वारा उत्साही भक्ति के साथ जपते हैं। यह सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है जो मृत्यु के डर को दूर करने और मुक्ति या सर्वोच्च मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है जो कि किसी के लिए आशा कर सकता है। इस मंत्र का जप करते हुए एक उच्च सकारात्मक कंपन पैदा करता है जो शारीरिक और मानसिक दोनों असुविधाओं को कम कर सकता है और भक्त को शांति और शांति में डाल सकता है। जब भ्रम और परेशानियों के साथ जीवन बहुत बड़ा है, तो कई लोग इस मंत्र में शरण लेते हैं और अपनी समस्याओं से मुक्त होते हैं। हालांकि छोटा, शिव मंत्र बहुत मजेदार और जप करने के लिए दिलचस्प है।
शिव मंत्र:
ॐ ट्रेमंबक यजमाहे सुगंधिम पुष्ठी वर्धनम उर्वरुकिमिव भंडानत श्रीमतीमोकक्षेया ममृितता
शिव मंत्र का कुल मिलाकर अनुवाद:
हम तीन आंखों (भगवान शिव) की पूजा करते हैं जो गुरु और भगवान हैं। वह बहुत सुखी और पोषण करता है और सभी प्राणियों का ख्याल रखता है। पका हुआ ककड़ी मुक्त है। मैं प्रार्थना करता हूं कि प्रभु ने मुझे मृत्यु से मुक्त किया और मेरे ऊपर अमरता प्रदान किया।
www.jinekeupay.com
शिव मंत्र का विस्तृत अनुवाद:
ट्रेम्बाकमः तीन आंखों वाले देवता शिव की तीन आंखें हैं जो प्रकाश के तीन स्रोतों को दर्शाती हैं, अर्थात् सूर्य, चंद्रमा और आग। यह तीन बार अतीत, वर्तमान और भविष्य का भी प्रतीक है शिव को सभी प्रकाश का स्रोत और समय के स्वामी कहा जाता है एक कविता उसे कालाया और कलथेथ्या के रूप में संबोधित करती है (वह समय भी है जिसने समय पर विजय प्राप्त की है) याजमाहे: भगवान या मास्टर ब्रह्मांड को बनाए, बनाए रखने और नष्ट करने वाली सभी शक्तियों के निर्माता होने के नाते, शिव को हिंदू धर्मशास्त्र में परम सर्वोच्च सिर माना जाता है।
सुगन्धिम:
शिव हमेशा परमात्मा की खुशबू से भरा होता है क्योंकि वह प्रकृति के तत्वों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
पुष्ठी वर्धन:
भगवान शिव ने इस धरती पर पैदा हुए सभी प्राणियों को पोषण किया और उनके विकास और भलाई का ख्याल रखा। वह विधिवत उन सभी लोगों को वितरित करता है जो जन्म और मृत्यु चक्र के दौरान उनके द्वारा किए गए अच्छे कर्मों और बुरे कर्मों के अनुसार हर प्राणियों के योग्य होते हैं।
उर्वारुकैमिवा:
पका हुआ ककड़ी (परिपक्व ककड़ी का उदाहरण तुलना के लिए इस जगह के लिए उपयुक्त है क्योंकि किसान फल की स्थिति की जांच करता है और जो उपभोग के लिए तैयार हैं उन्हें हटा देता है। एक बार ककड़ी का पका हुआ होता है, इसे संयंत्र से हटा दिया जाता है और भेजा जाता है इसी तरह, आकांक्षी जन्मों और मृत्यु के चक्र से मुक्त होने की कोशिश करता है.यहाँ आध्यात्मिक साधक की तुलना ककड़ी, जबकि भगवान शिव की किसान की तुलना है।
भंडारत: हटाया गया और मुक्ति श्रीमती: मौत से मोक्षेशिया: स्वतंत्र ममरूत्तम: अमरता प्रदान करना उचतम आध्यात्मिक अभिप्रायियों के लिए शिव मंत्र होने का विश्वास होने पर, यह मंत्र संयोगवश श्लोक के रूप में जीवन के सामान्य क्षेत्रों में भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गया है और उन लोगों की प्रार्थनाओं का समाधान करने के लिए शक्ति है जो इसे चतुराई से जपते हैं। इस मंत्र के कुछ आसन्न लाभों में रोगों और असुविधाओं का इलाज शामिल है; मानसिक संतुलन और स्थिरता; तनाव और दीर्घायु से राहत विशेष रूप से यह मंत्र मृत्यु के भय को हटाता है और सभी खतरों से बचाता है। इसे नियमित रूप से जपाने के लिए एक महान साधना (आध्यात्मिक प्रथा) है जिसके लिए आशा कर सकते हैं।
शिव मंत्र:
ॐ ट्रेमंबक यजमाहे सुगंधिम पुष्ठी वर्धनम उर्वरुकिमिव भंडानत श्रीमतीमोकक्षेया ममृितता
शिव मंत्र का कुल मिलाकर अनुवाद:
हम तीन आंखों (भगवान शिव) की पूजा करते हैं जो गुरु और भगवान हैं। वह बहुत सुखी और पोषण करता है और सभी प्राणियों का ख्याल रखता है। पका हुआ ककड़ी मुक्त है। मैं प्रार्थना करता हूं कि प्रभु ने मुझे मृत्यु से मुक्त किया और मेरे ऊपर अमरता प्रदान किया।
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शिव मंत्र का विस्तृत अनुवाद:
ट्रेम्बाकमः तीन आंखों वाले देवता शिव की तीन आंखें हैं जो प्रकाश के तीन स्रोतों को दर्शाती हैं, अर्थात् सूर्य, चंद्रमा और आग। यह तीन बार अतीत, वर्तमान और भविष्य का भी प्रतीक है शिव को सभी प्रकाश का स्रोत और समय के स्वामी कहा जाता है एक कविता उसे कालाया और कलथेथ्या के रूप में संबोधित करती है (वह समय भी है जिसने समय पर विजय प्राप्त की है) याजमाहे: भगवान या मास्टर ब्रह्मांड को बनाए, बनाए रखने और नष्ट करने वाली सभी शक्तियों के निर्माता होने के नाते, शिव को हिंदू धर्मशास्त्र में परम सर्वोच्च सिर माना जाता है।
सुगन्धिम:
शिव हमेशा परमात्मा की खुशबू से भरा होता है क्योंकि वह प्रकृति के तत्वों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती।
पुष्ठी वर्धन:
भगवान शिव ने इस धरती पर पैदा हुए सभी प्राणियों को पोषण किया और उनके विकास और भलाई का ख्याल रखा। वह विधिवत उन सभी लोगों को वितरित करता है जो जन्म और मृत्यु चक्र के दौरान उनके द्वारा किए गए अच्छे कर्मों और बुरे कर्मों के अनुसार हर प्राणियों के योग्य होते हैं।
उर्वारुकैमिवा:
पका हुआ ककड़ी (परिपक्व ककड़ी का उदाहरण तुलना के लिए इस जगह के लिए उपयुक्त है क्योंकि किसान फल की स्थिति की जांच करता है और जो उपभोग के लिए तैयार हैं उन्हें हटा देता है। एक बार ककड़ी का पका हुआ होता है, इसे संयंत्र से हटा दिया जाता है और भेजा जाता है इसी तरह, आकांक्षी जन्मों और मृत्यु के चक्र से मुक्त होने की कोशिश करता है.यहाँ आध्यात्मिक साधक की तुलना ककड़ी, जबकि भगवान शिव की किसान की तुलना है।
भंडारत: हटाया गया और मुक्ति श्रीमती: मौत से मोक्षेशिया: स्वतंत्र ममरूत्तम: अमरता प्रदान करना उचतम आध्यात्मिक अभिप्रायियों के लिए शिव मंत्र होने का विश्वास होने पर, यह मंत्र संयोगवश श्लोक के रूप में जीवन के सामान्य क्षेत्रों में भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गया है और उन लोगों की प्रार्थनाओं का समाधान करने के लिए शक्ति है जो इसे चतुराई से जपते हैं। इस मंत्र के कुछ आसन्न लाभों में रोगों और असुविधाओं का इलाज शामिल है; मानसिक संतुलन और स्थिरता; तनाव और दीर्घायु से राहत विशेष रूप से यह मंत्र मृत्यु के भय को हटाता है और सभी खतरों से बचाता है। इसे नियमित रूप से जपाने के लिए एक महान साधना (आध्यात्मिक प्रथा) है जिसके लिए आशा कर सकते हैं।
786 को याद करने से हर काम हो जाता है आसान
अक्षांश ओम में 10000 से अधिक अर्थ हैं और इनमें से एक ईश्वर है। पथ भिन्न हो सकते हैं, लेकिन हमारे पास सभी के पास एक और केवल एक सर्वशक्तिमान है, अंतर कई भाषाओं में है कुछ हिंदू अनुयायी भी मानते हैं कि 786 की संख्या ओम है। मिस्र से कुछ मुसलमान 786 के महत्व को नहीं जानते, हालांकि, यह एशिया के मुसलमानों के लिए पवित्र है। कुछ इसे एक भाग्यशाली संख्या के रूप में कहते हैं जबकि अन्य का दावा है कि इसका अर्थ है बिस्मिल्लाह। दरअसल, 786 नंबर अल्लाह का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व माना जाता है। लेकिन कोई भी इस्लामिक विद्वान अब तक इस संख्या की उत्पत्ति की व्याख्या नहीं कर पाया है। वास्तव में, इसका उल्लेख कुरान में नहीं है,
786 की उत्पत्ति
यद्यपि इस्लाम में संख्या 786 के महत्व का कोई सबूत नहीं है, फिर भी हम कई मुस्लिमों को बिस्मिल्लाह की जगह इस संख्या का उपयोग करने की प्रवृत्ति को देखते हैं। यह प्रथा पैगंबर मुहम्मद के समय से नहीं है। यह कहा जाता है कि अगर बिस्मिल्ला अल रहमान अल रहम अरबी उर्दू में लिखा जाता है, तो इन पत्रों का योग 786 तक बढ़ जाता है, इसलिए लोग 786 को अल्लाह के नाम के स्थान के रूप में इस्तेमाल करते हैं। संख्या विज्ञान को इस्लाम में निषिद्ध है, लेकिन कुछ मुसलमानों के अनुसार, लोगों ने इस्लाम में कुछ संख्याओं को अरबी पत्रों से जोड़कर इसे प्रस्तुत किया है।
हिंदू धर्म के साथ 786 के संबंध
कई वैदिक धर्म अनुयायियों के अनुसार, संख्या 786 का अर्थ है ओम, जिसका काबालाह के साथ संबंध है। राफेल पटई अपनी पुस्तक द यहूदी माइंड में बताते हैं, तंत्र और कबाला के बीच समानताएं, वहाँ इस सबूत का समर्थन करने के लिए इस विचार का समर्थन करते हैं कि प्रारंभिक कब्रिस्तानियों और टैंट्रिक्स के बीच संचार होता था।
786 की उत्पत्ति
यद्यपि इस्लाम में संख्या 786 के महत्व का कोई सबूत नहीं है, फिर भी हम कई मुस्लिमों को बिस्मिल्लाह की जगह इस संख्या का उपयोग करने की प्रवृत्ति को देखते हैं। यह प्रथा पैगंबर मुहम्मद के समय से नहीं है। यह कहा जाता है कि अगर बिस्मिल्ला अल रहमान अल रहम अरबी उर्दू में लिखा जाता है, तो इन पत्रों का योग 786 तक बढ़ जाता है, इसलिए लोग 786 को अल्लाह के नाम के स्थान के रूप में इस्तेमाल करते हैं। संख्या विज्ञान को इस्लाम में निषिद्ध है, लेकिन कुछ मुसलमानों के अनुसार, लोगों ने इस्लाम में कुछ संख्याओं को अरबी पत्रों से जोड़कर इसे प्रस्तुत किया है।
हिंदू धर्म के साथ 786 के संबंध
कई वैदिक धर्म अनुयायियों के अनुसार, संख्या 786 का अर्थ है ओम, जिसका काबालाह के साथ संबंध है। राफेल पटई अपनी पुस्तक द यहूदी माइंड में बताते हैं, तंत्र और कबाला के बीच समानताएं, वहाँ इस सबूत का समर्थन करने के लिए इस विचार का समर्थन करते हैं कि प्रारंभिक कब्रिस्तानियों और टैंट्रिक्स के बीच संचार होता था।
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ज्यादातर लोग मानते हैं दौड़ने से आप स्वस्थ रह सकते हैं पर लोग दौड़ने के लिए आलास करते हैं। इसलिए आज हम आपको दौड़ने के बारे में बताने जा रहे हैं। आशा करते हैं आपको इस पोस्ट से दौड़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और आपका स्वास्थ्य बेहतर बनेगा।
दौड़ना जॉगिंग व्यायाम करने का सबसे आसान तरिका है। चाहें बच्चे हो या बड़े या फिर बूढ़े लोग हर कोई दौड़ लगा सकता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही लाभदायक होता है
ह्रदय स्वस्थ रहता है
नियमित रूप से दौड़ने और व्यायाम करने से रक्त वाहिकाएं और हार्ट का कोलेस्ट्ररोल लेवल भी कम होता है और हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का शिकायत भी दूर होता हो।
ज्यादातर दौड़ने वाले लोग को 55 प्रतिशत कम हार्ट अटैक होने का खतरा होता है जो की बहुत ही अच्छा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहा जाता है कि उनके जीवन काल में 30 प्रतिशत की ब्रुधि होती है।
फेफड़े स्वस्थ रहते हैं
दौड़ने से हार्ट रेट बढ़ता है और उसके कारण फुसफुस तेज़ी से काम करते हैं। इससे फुसफुस या फेफड़ों का मांसपेशी मजबूत होता है।
मोटापा कम करने में मदद मिलती है
दौड़ने से शरीर के कोशिकाओं को ज्यादा एनर्जी की आवश्यकता पड़ती है और ऐसे में शरीर का मेटाबोलिज्म बढ़ जाता है। ज्यादा एनर्जी की जरूरत के कारण शरीर ज्यादा से ज्यादा कैलोरीज को बर्न करता है जिससे वज़न घाटाने में मदद मिलती है।
अच्छी नींद के लिए मदद
अनिद्रा शारीर के लिए बहुत बड़ा रोग है क्योंकि इससे अपचन सिर में दर्द और काम करते समय मुश्किलें पैदा होती हैं। ऐसे में प्रतिदिन सुबह-शाम दो बार दौड़ने या जॉगिंग करने से अच्छी नींद आती है और खाना हज़म भी होता है।
शरीर के हड्डियों को मजबूत बनाता है
दौड़ने से पैरों की हड्डियों में मजबूती आती है। पैरों की हड्डियों में ही शरीर के लिए सबसे अधिक मात्र में रक्त निर्माण होता है इसलिए पैरों और जांघों की हड्डियों के मजबूत होने से शरीर स्वस्थ रहता है।
दौड़ना जॉगिंग व्यायाम करने का सबसे आसान तरिका है। चाहें बच्चे हो या बड़े या फिर बूढ़े लोग हर कोई दौड़ लगा सकता है और यह स्वास्थ्य के लिए भी बहुत ही लाभदायक होता है
ह्रदय स्वस्थ रहता है
नियमित रूप से दौड़ने और व्यायाम करने से रक्त वाहिकाएं और हार्ट का कोलेस्ट्ररोल लेवल भी कम होता है और हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का शिकायत भी दूर होता हो।
ज्यादातर दौड़ने वाले लोग को 55 प्रतिशत कम हार्ट अटैक होने का खतरा होता है जो की बहुत ही अच्छा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कहा जाता है कि उनके जीवन काल में 30 प्रतिशत की ब्रुधि होती है।
फेफड़े स्वस्थ रहते हैं
दौड़ने से हार्ट रेट बढ़ता है और उसके कारण फुसफुस तेज़ी से काम करते हैं। इससे फुसफुस या फेफड़ों का मांसपेशी मजबूत होता है।
मोटापा कम करने में मदद मिलती है
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अच्छी नींद के लिए मदद
अनिद्रा शारीर के लिए बहुत बड़ा रोग है क्योंकि इससे अपचन सिर में दर्द और काम करते समय मुश्किलें पैदा होती हैं। ऐसे में प्रतिदिन सुबह-शाम दो बार दौड़ने या जॉगिंग करने से अच्छी नींद आती है और खाना हज़म भी होता है।
शरीर के हड्डियों को मजबूत बनाता है
दौड़ने से पैरों की हड्डियों में मजबूती आती है। पैरों की हड्डियों में ही शरीर के लिए सबसे अधिक मात्र में रक्त निर्माण होता है इसलिए पैरों और जांघों की हड्डियों के मजबूत होने से शरीर स्वस्थ रहता है।
ऑनलाइन पैसा कमाना है तो अपनाये ये ट्रिक्स महीने के आठ हजार से ज्यादा मिलेंगे
9 Jul. 2017
Earn Online Money
आज कल सभी लोग पैसा कमाने के बारे में सोचते है छोटा हो या बड़ा सभी को पैसे की जरूरत होती है लेकिन उनको पता नही रहता की पैसे कैसे कमाये लेकिन आज मै आपको सही तरीका बताऊंगा पैसे कमाने के लिए।
अमेज़न से लाखों रूपये कमाये
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इ कॉमर्स वेबसाइट एक ऐसी वेबसाइट है जहाँ लोग अपने समान को अमेज़न पे बेच सकते जिसके आपको अच्छे इनकम मिलेंगे आपको करना क्या है कुछ सामान खरीद लीजिये बाहर से और इ कॉमर्स पर आप उसे अच्छे मुनाफे में बेच सकते है।
यूट्यूब पे वीडियो डाल कर
यूट्यूब पैसा कमाने का सबसे आसान तरीका है इसमें आप अपना अकाउंट खोल लीजिये और अपने आस पास के घटनाओं का वीडियो अपलोड करदे जितने लोग आपके वीडियो को देखेंगे आप की इनकम उतनी ही बढ़ेगी।
फ्रीलान्स
google
अगर आपको लिखने का शौख है तो आप फ्रीलान्स पे काम कर सकते है आप को काम मिलेगा की इतने दिन में ऑनलाइन इतने वर्ड का एक आर्टिकल लिखना है आपको टाइम से सैलरी मिलती रहेगी धन्यवाद अगर कोई परेशानी हो तो नीचे कमेंट करे।
9 Jul. 2017
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